हरियाणा

उर्दू भाषा एवं कला संकाय के ग़ज़लकार निदा फ़ाज़ली की स्मृति में कार्यक्रम

कुरुक्षेत्र, 19 अक्टूबर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भाषा एवं कला संकाय के उर्दू भाषा विभाग में ग़ज़लकार निदा फ़ाज़ली की स्मृति में उर्दू भाषा के विकास पर केंद्रित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मोहम्मद सलीम स्वास्थ्य विभाग चंडीगढ़ ने कहा कि उर्दू किसी भी मजहब की भाषा नहीं है यह सब की भाषा है। आज भी हम उर्दू भाषा के बहुत से शब्दों का प्रयोग करते हैं हमें मालूम नहीं कि कौन सा शब्द किस भाषा का है।

विशिष्ट अतिथि मौलाना सग़ीर अहमद चीनी जामा मस्जिद ने कहा कि ने कहा कि उर्दू भाषा संतों, फकीरों,पीरो, पैगम्बरों की रही है। हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तीनों बहन है इनमें किसी भी तरह की भिन्नता नहीं है तथा एक मां की बेटी हैं । कार्यक्रम की शुरूआत विश्वविद्यालय के कुलगीत, सरस्वती वंदना व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई ।

डॉ.पुष्पा रानी अधिष्ठात्री भाषा एवं कला संकाय ने कहा कि निदा फ़ाज़ली न केवल एक शायर थे बल्कि वे अपनी ग़ज़लों और नज़्मों में दार्शनिक की भूमिका में भी नजर आते हैं तो कहीं तरक्की पसंद तहरीर की बात करते हैं।

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डॉ.सुभाषचंद्र ने कहा कि उर्दू भाषा इंकलाब की भाषा है आजादी के आन्दोलन से जुड़े सभी कार्य उर्दू में हुए हैं। उस समय में सभी शायर, अफसाना निगार, उर्दू भाषा में ही लिखते थे।

डॉ.कुलदीप सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा से अगर उर्दू भाषा के शब्दों को निकाल दिया जाता है तो फिर भाषा पंजाबी नहीं रहती है हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तीनों बहन है एक गर्भ से उत्पन्न हुई हैं। हरियाणवी संस्कृति में भी उर्दू भाषा का बखूबी इस्तेमाल किया जाता है।

डॉ.आर के सूदन ने कहा कि उर्दू भाषा का इस्तेमाल आज भी कचहरी में, पुलिस विभाग में, अदालत में कायम है। मंच संचालन अनुवाद विभाग की ऋचा व उर्दू भाषा विभाग की छात्रा मुस्कान ने किया।

इस मौके पर निदा फ़ाज़ली के साहित्य पर शोधकर्ताओं ने और विद्यार्थियों जुबेर, गुरबचन, यामीन रामलाल, अजय मुस्कान, अलीखान, रवि, मनप्रीत, मलकीत, ममता, जितेन्द्र, प्रिया, सागर, बलजीत, जयदेव आदि ने शोध पत्र प्रस्तुत किये।

इस मौके पर अधिष्ठात्री भाषा एवं कला संकाय एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग डॉ. पुष्पा रानी, पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी डॉ. सुभाषचंद्र, विभागाध्यक्ष पंजाबी डॉ. कुलदीप सिंह, पंजाबी विभाग से ही डॉ. देवेन्द्र बीबीपुरिया, डॉ. गुरप्रीत सिंह, अनुवाद विभाग से डॉ. रश्मि प्रभा, संचार कौशल विभाग से डॉ. वंदना कौल, उर्दू विभाग से सहायक प्राध्यापक मनजीत सिंह, संगीत विभाग से डॉ.पुरुषोत्तम, सहायिका सोनिया, रिंकू आदि मौजूद रहे।

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