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महिलाओं को 2029 से रिजर्वेशन, लोकसभा में बढ़ेंगी सीटें, संशोधन बिल लाने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली

लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने के लिए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आई थी। यह बिल पारित हो जाने के बावजूद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू नहीं हो सका है। अब सरकार जल्द से जल्द महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने, यह कानून लागू करने की तैयारी में है। महिलाओं को आरक्षण देने के लिए सरकार अब संसद में संशोधन विधेयक लाएगी। इस बिल में लोकसभा सीटों के परिसीमन और सीटें बढ़ाने के लिए 2011 की जनगणना को ही आधार मानने का प्रावधान किया जाएगा। यह संशोधन विधेयक पारित होने के बाद नए परिसीमन में लोकसभा की सीटें 543 से बढक़र 816 हो जाएंगी।


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816 सदस्यों वाली लोकसभा में 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जो संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था, उसमें यह प्रावधान था कि यह नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा। अब सूत्रों का कहना है कि सरकार इस हफ्ते नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम बिल में संशोधन लेकर आएगी। यह संशोधन इसलिए लाया जा रहा है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू किया जा सके।

कारपोरेट कानून विधेयक 2026 संयुक्त संसदीय समिति को भेजा


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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोक सभा में कारपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसे विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया। कांग्रेस के मनीष तिवारी, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय और द्रमुक की डॉ. टी सुमति ने भी विधेयक का विरोध किया। इस पर श्रीमती सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक दो वर्ष की चर्चा के बाद लाया गया है। यह विधेयक कारपोरेट सुशासन और कंपनियों में अधिक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। इसके बाद वित्त मंत्री ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

विधेयक की प्रति न मिलने पर उखड़ी तृणमूल कांग्रेस


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नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 की प्रति सदस्यों को समय से उपलब्ध नहीं कराए जाने के विरोध में सोमवार को सदन से बहिर्गमन किया। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने शून्यकाल शुरू होने से पहले यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सदन की सोमवार की कार्य सूची में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधयेक 2026 सूचीबद्ध है।

न्यूनतम बैलेंस के नाम पर पैनल्टी हटाने की मांग

नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को निजी बैंकों द्वारा न्यूनतम बैलेंस के नाम पर वसूली जाने वाली पेनल्टी का मुद्दा उठा और इसे समाप्त करने की मांग की गई। द्रमुक के डॉ गणपति राजकुमार पी ने शून्यकाल के दौरान कहा कि निजी क्षेत्र के बैंक साधारण लोगों पर बोझ डालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2024-25 में भारतीय बैंकों ने न्यूनतम बैंलेंस नहीं रखने पर 19,886 करोड़ रुपए वसूलने का काम किया है। यह वसूली दैनिक मजदूरों, छोटे किसानों और छात्रों से की गई है। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक ने इस प्रकार की वसूली को 2020 में बंद कर दिया था। सार्वजनिक क्षेत्र के 12 में से नौ बैंकों ने न्यूनतम बैलेंस पर लगने वाला जुर्माना हटा दिया है, लेकिन निजी क्षेत्र अब भी वसूली कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से निजी बैंकों द्वारा न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर लगाई जाने वाली पेनाल्टी खत्म करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों से यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है, उसके बावजूद निजी बैंक गरीबों से रकम वसूल कर उन्हें परेशान कर रही है।

संकटग्रस्त आवास परियोजनाओं को शर्त पूरा होने पर ही मिलेगी मदद

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि संकटग्रस्त आवास योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है, लेकिन परियोजना की शर्तों का इसमें पूरा होना आवश्यक है, तभी परियोजना के लिए मदद दी जा सकती है। श्रीमती सीतारमण ने लोकसभा में सोमवार को एक सवाल के जवाब में कहा कि ‘संकटग्रस्त आवास परियोजनाओं के लिए ‘स्वामीह’ योजना’ के तहत पहला चरण 2022 तक चला। इस चरण के लिए 15000 करोड़ रुपए से अधिक आबंटित किए गए थे और इसमें 10000 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। वर्ष 2022 के बाद के बाद दूसरी योजना चल रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए कुछ शर्ते रखी गई है और उन सबका का पूरा होना आवश्यक है। इसके लिए सीमा तय की गई है और यदि प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है तो फिर उसके लिए स्वामी योजना उपलब्ध नहीं होगी।

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