
कुरुक्षेत्र, 17 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में वाणिज्य विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एम.ए. संगीत कार्यक्रम में प्रवेश हेतु आवेदन आमंत्रित किए हैं। ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 जून निर्धारित की गई है।
विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि संगीत एवं नृत्य विभाग भारतीय शास्त्रीय संगीत, वादन, गायन तथा नृत्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उच्चस्तरीय शोध और अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र बन चुका है। वर्ष 1975 में स्थापित इस विभाग ने अपनी स्थापना के बाद से संगीत शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
विभाग में वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए एम.ए. संगीत (वोकल एवं इंस्ट्रुमेंटल) के दो वर्षीय तथा एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के अवसर उपलब्ध हैं। दो वर्षीय एम.ए. संगीत (वोकल एवं इंस्ट्रुमेंटल) कार्यक्रम में कुल 36 सीटें निर्धारित हैं। वहीं इसके अतिरिक्त कश्मीरी प्रवासी, अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों, खेल प्रतिभाओं, एनसीसी, एनएसएस तथा सिंगल गर्ल चाइल्ड सहित विभिन्न श्रेणियों के लिए 17 सुपरन्यूमेरेरी सीटों का भी प्रावधान किया गया है। वहीं एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम एम.ए. संगीत (वोकल) में 6 तथा एम.ए. संगीत (इंस्ट्रुमेंटल) में 4 सीटें उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि विभाग में शोध और उच्च शिक्षा के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। संगीत के विभिन्न अंतर्विषयक क्षेत्रों में पीएचडी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसमें शास्त्रीय गायन, वादन, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोक संगीत एवं लोक नृत्य से जुड़े विषयों पर शोध कार्य किया जाता है। विशेष रूप से हरियाणा की लोक-सांस्कृतिक परंपराओं और भारत के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विभाग विशेष ध्यान देता है।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि संगीत विभाग अपने विद्यार्थियों को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि संगीत और नृत्य के माध्यम से रचनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना और कलात्मक अभिव्यक्ति को भी प्रोत्साहित करता है। शास्त्रीय संगीत, वादन, गायन तथा नृत्य की विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त कर विद्यार्थी अकादमिक, सांस्कृतिक और पेशेवर क्षेत्रों में उत्कृष्ट करियर बना रहे हैं। संगीत एवं नृत्य विभाग आज विश्वविद्यालय के उन प्रमुख विभागों में शामिल है जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दाखिले से संबंधित विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि संगीत एवं नृत्य विभाग भारतीय शास्त्रीय संगीत, वादन, गायन तथा नृत्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उच्चस्तरीय शोध और अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र बन चुका है। वर्ष 1975 में स्थापित इस विभाग ने अपनी स्थापना के बाद से संगीत शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
विभाग में वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए एम.ए. संगीत (वोकल एवं इंस्ट्रुमेंटल) के दो वर्षीय तथा एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के अवसर उपलब्ध हैं। दो वर्षीय एम.ए. संगीत (वोकल एवं इंस्ट्रुमेंटल) कार्यक्रम में कुल 36 सीटें निर्धारित हैं। वहीं इसके अतिरिक्त कश्मीरी प्रवासी, अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों, खेल प्रतिभाओं, एनसीसी, एनएसएस तथा सिंगल गर्ल चाइल्ड सहित विभिन्न श्रेणियों के लिए 17 सुपरन्यूमेरेरी सीटों का भी प्रावधान किया गया है। वहीं एक वर्षीय पीजी प्रोग्राम एम.ए. संगीत (वोकल) में 6 तथा एम.ए. संगीत (इंस्ट्रुमेंटल) में 4 सीटें उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि विभाग में शोध और उच्च शिक्षा के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। संगीत के विभिन्न अंतर्विषयक क्षेत्रों में पीएचडी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसमें शास्त्रीय गायन, वादन, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, लोक संगीत एवं लोक नृत्य से जुड़े विषयों पर शोध कार्य किया जाता है। विशेष रूप से हरियाणा की लोक-सांस्कृतिक परंपराओं और भारत के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विभाग विशेष ध्यान देता है।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि संगीत विभाग अपने विद्यार्थियों को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि संगीत और नृत्य के माध्यम से रचनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना और कलात्मक अभिव्यक्ति को भी प्रोत्साहित करता है। शास्त्रीय संगीत, वादन, गायन तथा नृत्य की विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त कर विद्यार्थी अकादमिक, सांस्कृतिक और पेशेवर क्षेत्रों में उत्कृष्ट करियर बना रहे हैं। संगीत एवं नृत्य विभाग आज विश्वविद्यालय के उन प्रमुख विभागों में शामिल है जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दाखिले से संबंधित विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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