
बैठक में सर्वप्रथम पिछली शैक्षणिक परिषद की बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की गई तथा उस पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की गई। इसके उपरांत परिषद ने विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों एवं उद्योगों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) को मंजूरी प्रदान की। इनमें नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन, नई दिल्ली, टीएआई इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम, द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) तथा इंस्टीट्यूट फॉर स्पेशियल प्लानिंग एंड एनवायरनमेंट रिसर्च (आईएसपीईआर) के साथ हुए समझौते शामिल हैं। बैठक में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र तथा मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज, फरीदाबाद के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (डवन्) को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया। इन समझौतों से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को प्रशिक्षण, अनुसंधान, कौशल विकास, इंटर्नशिप तथा रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उच्च शिक्षा में शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन की पारंपरिक पद्धतियों में व्यापक बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में एआई विद्यार्थियों के लिए विषय आधारित वीडियो, रील और डिजिटल अध्ययन सामग्री तैयार कर सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगा।
प्रो. सचदेवा ने बताया कि एआई आउटकम बेस्ड एजुकेशन (ओबीई) को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने, ब्लूम्स टैक्सोनॉमी के अनुरूप प्रश्नपत्र तैयार करने तथा पाठ्यक्रम उद्देश्यों की प्राप्ति का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक शिक्षण और मूल्यांकन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा परिणामोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगी। एनईपी-2020 के लक्ष्यों की प्राप्ति और उच्च शिक्षा में सुधारों के लिए एआई आधारित नवाचारों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विश्वविद्यालय ने उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम सफलतापूर्वक शुरू किए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष विश्वविद्यालय ने ऐसे चार कार्यक्रम शुरू किए थे और मुंबई विश्वविद्यालय के बाद देश का दूसरा विश्वविद्यालय बना था जिसने यूजीसी की अनुमति मिलने के तुरंत बाद इन कार्यक्रमों को लागू किया। उन्होंने कहा कि एईडीपी के तहत विद्यार्थियों को अपनी डिग्री अवधि का एक बड़ा हिस्सा उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालय ने इस मॉडल में कुल पाठ्यक्रम अवधि का लगभग एक-तिहाई भाग उद्योगों के साथ जोड़ा है, जिसके तहत विद्यार्थियों का तीसरा वर्ष सीधे उद्योगों में प्रशिक्षण और कार्य अनुभव प्राप्त करने में व्यतीत होगा। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने भारत सरकार के बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के साथ समझौता किया है। बीओएटी विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतिष्ठित उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराएगा। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को प्रतिमाह आकर्षक स्टाइपेंड भी मिलेगा। पिछले वर्ष यह राशि 9 हजार रुपये प्रतिमाह थी, जिसे बढ़ाकर इस वर्ष 12 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। प्रो. सचदेवा ने कहा कि उद्योगों में लगभग एक वर्ष तक कार्य करने के बाद विद्यार्थियों के उसी संस्थान में रोजगार प्राप्त करने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि ये कार्यक्रम विद्यार्थियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो रहे हैं। पिछले वर्ष शुरू किए गए चार कार्यक्रमों के बाद इस वर्ष सात नए कार्यक्रम आरंभ किए जा रहे हैं। इस प्रकार विश्वविद्यालय में ऐसे रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों की कुल संख्या 11 हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों को विद्यार्थियों की ओर से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही है। कई कार्यक्रमों में 50 सीटों के मुकाबले एक हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि युवा अब उद्योगों से सीधे जुड़े कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि वर्तमान समय की मांग है कि विश्वविद्यालय अधिक से अधिक उद्योगोन्मुखी और कौशल आधारित कार्यक्रम प्रारंभ करें, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कई नए पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। परिषद ने इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज में बीसीए (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कार्यक्रम शुरू करने की मंजूरी प्रदान की। इसके अलावा भूविज्ञान विभाग में बी.एससी. जियोलॉजी प्रोफेशनल, बायोकेमिस्ट्री विभाग में बी.वोक. इंडस्ट्रियल बायोकैमिस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक साइंस विभाग में बी.एससी. सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी तथा इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल स्टडीज में बी.वोक. एनवायरनमेंटल साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी कार्यक्रमों को भी हरी झंडी दी गई। इसके साथ ही सांख्यिकी एवं ऑपरेशनल रिसर्च विभाग में बी.एससी. (डेटा साइंस) तीन वर्षीय पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने की मंजूरी दी गई।
बैठक में पीएचडी शोध प्रबंध (थीसिस) के मूल्यांकन के लिए बाहरी परीक्षक को दिया जाने वाला मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने की अनुशंसा की गई। इसी प्रकार, पीएचडी वाइवा-वोसे (मौखिक परीक्षा) के लिए निर्धारित मानदेय 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने को मंजूरी प्रदान की गई। इसके अलावा, विश्वविद्यालय के स्नातक (यूजी) एवं स्नातकोत्तर (पीजी) बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठकों में भाग लेने वाले बाहरी विषय विशेषज्ञों का मानदेय भी बढ़ाकर 1,500 रुपये करने की अनुशंसा की गई।
शैक्षणिक परिषद ने भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक अध्ययन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एम.ए. हिंदू स्टडीज कार्यक्रम प्रारंभ करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। वहीं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बीबीए (बिजनेस एनालिटिक्स) एईडीपी तथा बी.ए. (बिजनेस एंड इकोनॉमिक एनालिटिक्स) जैसे नवाचारपूर्ण कार्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज में बी.ए. के अंतर्गत अंबेडकर स्टडीज को नए प्रमुख विषय के रूप में प्रारंभ करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के बहुविषयक ढांचे, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट तथा क्रेडिट फ्रेमवर्क के अनुरूप संचालित किया जाएगा। बैठक में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के एम.ए. प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व पाठ्यक्रम को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के उद्देश्य से समकक्ष मान्यता देने का प्रस्ताव रखा गया। इस निर्णय से संबंधित विद्यार्थियों को आगे की शैक्षणिक गतिविधियों और प्रवेश प्रक्रियाओं में सुविधा मिलेगी।
बैठक में विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक निर्णय लिए गए। परिषद ने पुनः परीक्षा (री-अपीयर) वाले स्नातक विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रोविजनल प्रवेश देने से संबंधित संशोधनों को अनुमोदित किया। इसके साथ ही एम.एससी. माइक्रोबायोलॉजी तथा पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन आर्काइव्स एंड रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट की पात्रता शर्तों में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई।
परिषद ने विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत संशोधित पाठ्यक्रमों, परीक्षा योजनाओं और सिलेबस को भी मंजूरी प्रदान की। इन संशोधनों का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को बहु-विषयक, कौशल आधारित तथा उद्योगोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराना है।
बैठक में कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, डीन आफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. एनके माटा, प्रो. एसपी सिंह, प्रो. हरी सिंह, प्रो. सुनीता सिरोहा, प्रो. मंजुला चौधरी, प्रो. कृष्णा देवी, प्रो. नरेन्द्र, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. जसबीर सिंह, प्रो. महावीर सिंह, प्रो. आरके मोदगिल, प्रो. महेन्द्र चंद, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. रीटा, प्रो. विवेक चावला, प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. कुसुमलता, प्रो. परमेश कुमार, प्रो. एसके चहल, प्रो. ओमवीर सिंह, प्रो. अनिता दुआ, प्रो. सुरेन्द्र माही, प्रो. अवनीश वर्मा, प्रो. दीपक राय बब्बर, प्रो मुकेन्द्र कादियान, डॉ. जितेन्द्र खटकड़, प्रो. जितेन्द्र भारद्वाज, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, ओएसडी पवन रोहिला, उप-कुलसचिव विनोद वर्मा, विजय शर्मा सहित शैक्षणिक परिषद के सदस्यों, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों तथा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
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