
चंडीगढ़, 8 जून:
रंग, पेंट ब्रश और स्केच बुक भले ही असाधारण साधन लगें, लेकिन ये ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम के तहत पंजाब की नशों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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पंजाब के 15 जिलों में चल रहे 30 सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में आर्ट थेरेपी सत्र मरीजों की रिकवरी और पुनर्वास प्रक्रिया को मजबूत कर रहे हैं। ये सत्र मरीजों को नशा छोड़ने के दौरान आने वाली मुश्किलों से निपटने, अपनी भावनाओं को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने और फिर से आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद कर रहे हैं।
लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम (एलएमएचपी) के सहयोग से शुरू की गई समग्र पुनर्वास योजना के तहत, नशे के बुरे प्रभावों की रोकथाम और उन्हें कम करने के लिए भारत की पहली फैलोशिप के रूप में स्केचिंग, पेंटिंग, रंग भरना और हस्तकला तैयार करने जैसी कला-आधारित गतिविधियों को चिकित्सकीय इलाज और काउंसलिंग के साथ-साथ अपनाया जा रहा है। नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में दाखिल मरीजों में कला-आधारित थेरेपी बहुत ही सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम दे रही है।
इन केंद्रों में मरीज हर हफ्ते निर्धारित समय के लिए कला-संबंधी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। उनकी कलाकृतियां अक्सर उनके निजी जीवन, प्यारों की यादों, संघर्षों और सामान्य जीवन जीने की इच्छाओं को दर्शाती हैं।
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नशे की लत से प्रभावित लोगों के इलाज में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है उन्हें अपनी दबी हुई भावनाओं, अनुभवों और मनोभावों को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करना। आर्ट थेरेपी इस दूरी को कम करने में प्रभावशाली साबित हो रही है।
अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र की काउंसलर भावना शर्मा कहती हैं, “जब मरीज हमारे पास आते हैं तो वे बहुत कम बात करते हैं। वे चिंता से ग्रस्त होते हैं और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करते हैं। आर्ट थेरेपी सत्रों के दौरान वे रंग भरने और चित्रकारी जैसी गतिविधियों के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त करना शुरू कर देते हैं। हमने मल्टीमॉडल आर्ट थेरेपी, विजुअल आर्ट थेरेपी, एक्सप्रेसिव आर्ट थेरेपी और माइंडफुलनेस-आधारित कला गतिविधियां शुरू की हैं, ताकि मरीज अपनी भावनाओं को समझ सकें, नशा-मुक्त जीवन की ओर अपनी यात्रा की योजना बना सकें और भविष्य के प्रति आशावादी रह सकें।”
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अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र की एक अन्य काउंसलर नवनीत कौर का कहना है कि ये सत्र मरीजों को रिकवरी के दौरान सकारात्मक बनाए रखने में भी मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “रिकवरी के दौरान बहुत से लोग खुद को व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करते हैं। आर्ट थेरेपी उन्हें चित्रकारी, रंग भरने और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक सुरक्षित माध्यम प्रदान करती है। हमने देखा है कि ऐसे मरीज अधिक शांत हो जाते हैं और उनमें अंदरूनी सुकून की भावना विकसित होती है।”
उन्होंने एलएमएचपी फैलोशिप जैसी नवीन पहल की भी सराहना की, जिसके माध्यम से मनोविज्ञान और सामाजिक कार्य के क्षेत्र से जुड़े युवा, पेशेवर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तक आधुनिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं।
इलाज प्राप्त कर रहे मरीजों का कहना है कि आर्ट थेरेपी के लाभ सिर्फ कला कमरे तक सीमित नहीं हैं। कई मरीजों का मानना है कि ये सत्र उनका ध्यान नशे की तलब से हटाने और आत्मविश्वास फिर से हासिल करने में मदद करते हैं।
तरन तारन के एक नशा मुक्ति लाभार्थी गुरतेज सिंह (बदला हुआ नाम) ने कहा, “जब से मुझे आर्ट थेरेपी, फूलों के गुलदस्ते बनाने, रंग भरने और पेंटिंग जैसी गतिविधियों से परिचित करवाया गया है, मुझे अहसास हुआ है कि ऐसी छोटी-छोटी सुंदर चीजें भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। मेरे मामले में इससे नशा छोड़ने के दौरान आने वाली मुश्किलों से उबरने में बहुत मदद मिली। अब मेरे मन में नकारात्मक विचार नहीं आते और मैं पूरी तरह शांत महसूस करता हूं।”
सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास कार्यक्रम के एक अन्य लाभार्थी रुपिंदर सिंह (बदला हुआ नाम), जो राजासांसी के निवासी हैं और वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर के पुनर्वास केंद्र में भर्ती हैं, ने कहा, “आर्ट थेरेपी ने मुझे मानसिक शांति दी है। पहले मैं लगातार डिप्रेशन में रहता था। स्कूल के दिनों में ही मैं नशों का आदी हो गया था। यहां मिले इलाज से मुझे बहुत लाभ हुआ है। खास तौर पर आर्ट थेरेपी ने मेरा ध्यान नशे की ओर जाने वाली किसी भी इच्छा से दूर कर दिया। अब मैं ज्यादा खुश महसूस करता हूं।”
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार भलाई मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “युद्ध नशेयां विरुद्ध मुहिम के तहत भगवंत मान सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि नशे की लत से प्रभावित हर व्यक्ति को आर्ट थेरेपी सत्रों के माध्यम से भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग मिले। पुनर्वास सिर्फ नशे को ‘नहीं’ कहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीजों की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने, उनके जीवन को फिर से संवारने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया है।”
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