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शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान, कौशल विकास व सकारात्मक दृष्टिकोण का समग्र विकासः प्रो. सोमनाथ सचदेवा

कुरुक्षेत्र, 7 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में इलेक्ट्रॉनिक्स साइंस विभाग द्वारा विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आमंत्रित व्याख्यान एवं एमओयू (समझौता ज्ञापन) हस्ताक्षर समारोह का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। वंदे मातरम गीत व दीप प्रज्ज्वलन के बाद कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण का समग्र विकास करना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने भारत सरकार के बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (बीओएटी) के साथ एमओयू कर 10 से अधिक अप्रेंटिसशिप इंटीग्रेटेड डिग्री प्रोग्राम शुरू किए हैं, जिनमें विद्यार्थियों को उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ प्रतिमाह लगभग 10-12 हजार रुपये का स्टाइपेंड मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल को शुरू करने वाला कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणा का पहला और देश का दूसरा विश्वविद्यालय है। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय वर्तमान में 20 से अधिक पूर्णतः ऑनलाइन कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिनमें 12 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ ब्रिटेन, जापान और अमेरिका के विद्यार्थी भी शामिल हैं। उन्होंने एमओयू से जुड़े संस्थानों से इन कार्यक्रमों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने स्वामी विवेकानंद, ब्लूम टैक्सोनॉमी और श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ‘हेड, हैंड और हार्ट’ अर्थात ज्ञान, कौशल और मूल्यों का संतुलित विकास है। उन्होंने कहा कि गूगल, चैटजीपीटी और अन्य डिजिटल माध्यम ज्ञान उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन कौशल केवल अभ्यास और अनुभव से विकसित होता है। “योगः कर्मसु कौशलम” और “योगस्थः कुरु कर्माणि” का संदर्भ देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक दृष्टिकोण, कर्मनिष्ठा और व्यावहारिक दक्षता विकसित कर स्वयं को उद्योगों तथा समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्री विश्वकर्मा स्किल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने “स्किल विश्वविद्यालयों की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने उच्च शिक्षा में एक बड़ा बदलाव लाया है। अब केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक कौशल और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण प्राप्त करना भी उतना ही आवश्यक है।
प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए देश की युवा शक्ति को कौशलयुक्त बनाना होगा। जापान, जर्मनी जैसे देशों की प्रगति का प्रमुख आधार उनकी कौशल आधारित शिक्षा व्यवस्था रही है। उन्होंने कहा कि जापान, इटली सहित कई देशों में वृद्ध जनसंख्या की देखभाल के लिए प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता है, जहां भारतीय युवाओं के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को विदेशी भाषाएं, विशेषकर जापानी, जर्मन और फ्रेंच सीखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ भाषा कौशल जुड़ जाने पर वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर कई गुना बढ़ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कौशल, प्रशिक्षण और भाषा दक्षता के माध्यम से भारतीय युवा विश्व के किसी भी देश में अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी पहलें देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विद्यार्थियों को इन अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए ताकि वे न केवल अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकें, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

मानव रचना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने “भगवद्गीता एवं नेतृत्व” विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि ने कहा कि आधुनिक नेतृत्व और प्रबंधन के जिन गुणों को सफलता का आधार माना जाता है, उनका वर्णन श्रीमद्भगवद्गीता में सदियों पहले किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रवृत्ति, सकारात्मक दृष्टिकोण, सहयोग, सुनने की क्षमता, प्रेम और आत्मानुशासन जैसे गुण व्यक्ति को उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान करते हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि गीता का संदेश निरंतर सीखने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और हर परिस्थिति में सकारात्मक सोच रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि सच्चा नेता वही होता है जो दूसरों की बात सुनता है, सहयोग की भावना रखता है तथा अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रो. संजय श्रीवास्तव ने युवाओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों से गीता के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि ज्ञान, सेवा-भाव, आत्मानुशासन और सकारात्मक नेतृत्व के माध्यम से व्यक्ति और समाज दोनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
व्याख्यान सत्र के उपरांत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, श्री विश्वकर्मा स्किल विश्वविद्यालय तथा मानव रचना विश्वविद्यालय के मध्य समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के माध्यम से शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप गतिविधियों, कौशल विकास कार्यक्रमों, संकाय एवं छात्र विनिमय, इंटर्नशिप, संयुक्त कार्यशालाओं, संगोष्ठियों तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
डीन इंजिनियरिंग एंड टैक्नॉलनांजी प्रो. सुनील ढींगरा ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कौशल संवर्धन अब शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग बहुविषयक शिक्षा, संयुक्त अनुसंधान, नवाचार, प्रयोगशालाओं के साझा उपयोग, कार्यशालाओं एवं सम्मेलनों के आयोजन तथा विद्यार्थियों व शिक्षकों के विकास के नए अवसर प्रदान करेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को नई सोच, आधुनिक शैक्षणिक दृष्टिकोण तथा नेतृत्व संबंधी मूल्यों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों तथा विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन डॉ. रीटा ने किया।
इस अवसर पर प्रो. वाइस चांसलर डॉ. नरेश ग्रोवर, कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, इलेक्ट्रॉनिक्स साइंस विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार, डॉ. मीनाक्षी खुराना, प्रो. संजीव अग्रवाल, डॉ. आरके अरोड़ा, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. सुरेश कुमार, प्रो. अनुरेखा, प्रो. जीपी दुबे, डॉ. ज्योति राणा, डॉ. मोनिका गोयल, डॉ. सुमन वशिष्ठ, प्रो. नीरा राघव, प्रो. भगवान सिंह चौधरी, प्रो. परमेश कुमार, कुटा प्रधान डॉ. जितेन्द्र खटकड़, प्रो. मुकेन्द्र कादियान, डॉ. आनंद कुमार, डॉ. सुखबीर खोखरा, डॉ. पुनीत बंसल, डॉ. मनीष देवगन, डॉ. प्रभजीत कौर, डॉ. ललिता सहित शिक्षक, शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद थे।


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