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आधुनिक फ्रिज के दौर में भी कायम है घड़ा और सुराही का महत्व, गर्मियों में बढ़ जाती है मांग

भीषण गर्मी के बीच जहां एक ओर आधुनिक फ्रिज हर घर की जरूरत बनता जा रहा है, वहीं गांवों और गरीब परिवारों में आज भी घड़ा और सुराही लोगों की प्यास बुझाने का सबसे सस्ता और भरोसेमंद साधन बने हुए हैं। बिना बिजली के पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने वाले ये मिट्टी के बर्तन अब भी “गरीबों का फ्रिज” कहलाते हैं। भारत की पारंपरिक संस्कृति में घड़ा और सुराही का विशेष महत्व रहा है। घड़ा और सुराही मिट्टी से बनाए जाते हैं। मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पानी को ठंडा रखने की क्षमता होती है। इनके छोटे-छोटे छिद्रों से पानी धीरे-धीरे बाहर निकलकर वाष्पित होता है, जिससे अंदर का पानी ठंडा हो जाता है। गर्मियों में इनका पानी पीने से शरीर को ताजगी मिलती है और स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी की तुलना में घड़े का पानी अधिक लाभदायक माना जाता है।

गरीब परिवारों के लिए घड़ा और सुराही बहुत उपयोगी हैं क्योंकि इन्हें खरीदने में कम खर्च आता है और बिजली की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। जहां बिजली की सुविधा नहीं होती, वहां भी लोग आसानी से इनका उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हैं क्योंकि इनमें किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता। घड़ा और सुराही केवल उपयोगी वस्तुएं ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और ग्रामीण जीवन की पहचान भी हैं। आज जब लोग प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक चीजों की ओर लौट रहे हैं, तब घड़े और सुराही का महत्व फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।


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