
कुरुक्षेत्र, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन संस्थान द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास विकसित भारत-2047 के विजन की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि यदि हमें वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है तो आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी समान महत्व देना होगा। इससे पहले दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया व संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा द्वारा दो आम के पौधे भी रोपित किए गए।
प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन तथा जैव विविधता में कमी जैसी चुनौतियां आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चिंता का विषय हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और नीति निर्माताओं को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा और शोध का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जागरूकता का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण, हरित परिसर, ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन तथा सतत विकास से जुड़ी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दे रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के उद्देश्य से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत भी की गई है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि युवा वर्ग पर्यावरण संरक्षण अभियान का सबसे सशक्त भागीदार बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच अपनाने, नवाचार आधारित समाधान विकसित करने तथा अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतों को शामिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक छात्र द्वारा लगाया गया पौधा, बचाई गई पानी की एक-एक बूंद और ऊर्जा संरक्षण का प्रत्येक प्रयास विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), कुरुक्षेत्र के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. बलदेव सेतिया ने “पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने हरित प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और सतत नवाचारों के महत्व पर प्रकाश डाला।
पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के साथ संतुलित संबंध स्थापित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण भारतीय स्टेट बैंक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शाखा के एसबीआई बैंक मैनेजर राजीव बंसल के सहयोग से प्रतिभागियों को आकर्षक प्लांटर सहित तुलसी के करीब 250 पौधों का वितरण रहा। कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण सोसाइटी द्वारा किया गया और अंत में डॉ. पूजा अरोड़ा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. भगवान सिंह चौधरी, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. जीपी दुबे, प्रो. नरेन्द्र सिंह, प्राचार्या प्रो. रीटा, प्रो. हरदीप राय शर्मा, डॉ. दीप्ति ग्रोवर, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. पूजा अरोड़ा और डॉ. भावना दहिया, प्रो. अनिता भटनागर, प्रो. प्रेम सिंह, डीवाएसीए निदेशक प्रो. विवेक चावला, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, प्रो. दीपक राय बब्बर, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. गुरचरण सिंह, डॉ. मनीषा संघू, डॉ. पवन कुमार, एसबीआई बैंक मैनेजर राजीव बंसल, डॉ. पूजा, सहित शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी, पर्यावरणविद् मौजूद थे।
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