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अगर आप भी रखते हैं क्रिएटिव सोच, तो Interior Designing में बनाएं बेहतरीन करियर

अगर आप ऐसे करियर की तलाश में हैं जो आपको इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में क्रिएटिविटी दिखाने का मौका दे और साथ ही आपको प्रोफेशनल ग्रोथ दे, तो इंटीरियर डिजाइनिंग आपके लिए एक बेहतरीन करियर विकल्प हो सकता है। इंटीरियर डिजाइन अब सिर्फ घरों को सजाने तक ही सीमित नहीं रह गया है। आज यह एक व्यवस्थित और तेजी से बढऩे वाला प्रोफेशन है, जो रहने की जगहों, शॉप्स, ऑफिस, होटलों, मॉल और एक्सपीरियंस बेस्ड एनवायरमेंट को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है। इंटीरियर डिजाइनिंग में आप डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, बैचलर या मास्टर डिग्री जैसे कोर्स कर सकते हैं। ये कोर्स छह महीने से लेकर तीन साल तक के होते हैं। इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स करने के बाद आप इंटीरियर डिजाइनर, प्रोडक्ट डिजाइनर, कंसल्टेंट, डिजाइन जर्नलिस्ट्स जैसी प्रोफाइल पर काम कर सकते हैं।


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कोर्स का स्ट्रक्चर और मोड

भारत में इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, पीएचडी, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट लेवल पर मान्यता प्राप्त विभिन्न संस्थानों द्वारा ऑफर किए जाते हैं। यह सभी कोर्स आप फुल टाइम मोड में, अंग्रेजी मीडियम में कर सकते हैं। इंटीरियर डिजाइनिंग में कदम रखने के लिए आप 12वीं के बाद आसानी से सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स कर सकते हैं। इसके लिए सर्टिफिकेट कोर्स करीब छह महीने से एक साल तक का होता है, वहीं डिप्लोमा कोर्स एक से दो साल का होता है। इसके अलावा इंटीरियर डिजाइनिंग का डिग्री कोर्स तीन से चार साल तक के समय के लिए होता है। इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स में मूल रूप से डिजाइन प्रिंसिपल्स, स्पेस प्लानिंग, कलर-लाइट स्टडीज, मटेरियल सिलेक्शन, तकनीकी ड्रॉइंग-आउटकैड, थ्रीडी विजुअलाइजेशन और प्रेजेंटेशन स्किल जैसे विषय शामिल होते हैं, ताकि आप किसी स्थान को सुंदर, सुरक्षित और कार्यात्मक रूप से डिजाइन करना सीखें। इसके अलावा स्टूडियो-प्रोजेक्ट, केस स्टडी और प्रोजेक्ट वर्क भी कोर्स का हिस्सा होते हैं, जिससे आपको प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिलता है। वहीं टीचिंग मेथड के लिए आमतौर पर क्लास लेक्चर, वर्कशॉप, प्रोजेक्ट बेस्ड असाइनमेंट और सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग जैसे मोड अपनाए जाते हैं।

कोर्स


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अंडरग्रेजुएट

बीडेस इन इंटीरियर डिजाइन
बीएससी इन इंटीरियर डिजाइन
बीए (ऑनर्स) इंटीरियर डिजाइन


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पोस्टग्रेजुएट

एमडेस इन इंटीरियर डिजाइन
एमएसी इन इंटीरियर डिजाइन
मास्टर इन इंटीरियर आर्किटेक्चर
पीएचडी इन इंटीरियर डिजाइन

पीएचडी

डिप्लोमा कोर्सेज
डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइन
एडवांड्स डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइन ( एआईडी)

सर्टिफिकेट

सर्टिफिकेट इन इंटीरियर डिजाइन
सर्टिफिकेट इन स्टाइलिंग फॉर इंटीरियर्स
सर्टिफिकेशन इन कम्प्यूटर ऐडेड इंटीरियर डिजाइन (सीएआईडी)

जॉब प्रोफाइल

इंटीरियर डिजाइनर
विजुअल मर्चेंडाइजर
इंटीरियर आर्किटेक्ट
एग्जिबिशन डिजाइनर
किचन डिजाइनर
एक्सेसिबिलिटी कंसल्टेंट
लाइटिंग डिजाइनर
गिग हॉस्पिटैलिटी विजुअल डिजाइनर
फर्नीचर डिजाइनर
कलर कंसल्टेंट
लैंडस्केप आर्किटेक्चर
सस्टेनेबिलिटी कंसल्टेंट

इसलिए बढ़ाएं इस फील्ड में कदम

क्रिएटिविटी का अवसर: इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स के माध्यम से आप अपनी कल्पना और डिजाइन आइडियाज को आजमा सकते हैं और जगहों को सुंदर और कामकाजी बना सकते हैं।

बेहतर करियर अपॉर्चुनिटीज: भारत में रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और कॉमर्शियल स्पेस डिजाइन की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए यह एक तेजी से बढ़ता हुआ सेक्टर है, जिसमें आपको देश के अलावा विदेश में भी बेहतर करियर अपॉर्चुनिटीज मिलती हैं। आज हर जगह प्रोफेशनल इंटीरियर डिजाइनरों की मांग बढ़ गई है।

करियर के विविध अवसर: इंटीरियर डिजाइन इंडस्ट्री में आपको अपनी रुचि अनुसार करियर चुनने का विकल्प मिलता है।

पर्सनल और प्रोफेशनल ग्रोथ: इस कोर्स के माध्यम से आप कम्युनिकेशन, प्रॉब्लम सॉल्विंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसी स्किल्स सीखते हैं, जो आपके पर्सनल और प्रोफेशनल करियर में बहुत काम आती है।

प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस: इंटीरियर डिजाइनिंग में इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आपको अकादमिक नॉलेज को वर्क प्लेस में आजमाने का मौका मिलता है।

नए ट्रेंड्स सीखते रहना: यहां आप इंडस्ट्री के नवीनतम ट्रेंड और बदलती जरूरतों के अनुसार अपनी नॉलेज और स्किल्स को प्रासंगिक बनाए रख सकते हैं।
सेल्फ एम्प्लॉयमेंट की अपॉर्चुनिटी: इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स कंप्लीट करने के बाद आप फ्रीलांसिंग, अपना डिजाइन स्टूडियो, कंसल्टेंसी या फर्नीचर डिजाइन जैसे बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं। इसलिए यह कोर्स केवल नौकरी तक सीमित नहीं है।

सैलरी: शुरुआती के लिए वेतन लगभग 10,000 रुपए हो सकता है। वहीं मेट्रो सिटी में शुरुआती सैलरी 25,000 से 60,000 रुपए के करीब होती है। अनुभव के अनुसार, कैंडीडेंट्स की सैलरी बढक़र 30,000 रुपए से 75,000 रुपए तक हो सकती है। वहीं सीनियर प्रोफेशनल की सैलरी करीब 12 लाख रुपए प्रति वर्ष तक है।

शैक्षणिक योग्यता

आपने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 या समकक्ष परीक्षा किसी भी स्ट्रीम से पास की हो। इसके बाद ही आप सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या ग्रेजुएशन कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि पोस्ट ग्रेजुशन करने के लिए आपको न्यूनतम 55 फीसदी अंकों के साथ ग्रेजुएशन करना अनिवार्य होगा।

न्यूनतम अंक

भारत के अधिकांश संस्थानों में चयनित कोर्स में एडमिशन के लिए न्यूनतम 55 फीसदी अंक आवश्यक होते हैं। हालांकि कुछ संस्थानों में यह अधिक हो सकता है या आरक्षित वर्ग को न्यूनतम अंकों में छूट मिल सकती है।

आयु सीमा

सामान्यत: इस कोर्स के लिए कोई न्यूनतम या अधिकतम आयुसीमा नहीं होती।

प्रवेश प्रक्रिया

भारत के कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स के लिए राष्ट्रीय, राज्य और विश्वविद्यालय स्तरीय प्रवेश परीक्षा (जैसे सीयूईटी यूजी, यूसीईईडी, एनआईडी एंट्रेंस, एनआईएफटी एंट्रेस, सीयूईटी पीजी, जेईईसीयूपी व एसईईडी) आयोजित की जाती है। हालांकि कुछ संस्थानों में मेरिट बेस्ड एडमिशन भी दिया जाता है।

ये सब सीखते हैं छात्र

जो स्टूडेंट्स इस फील्ड की पढ़ाई करते हैं उन्हें आर्किटेक्चर और बिल्डिंग्स के डिजाइन के बारे में बताया जाता है। यह विषय ऐसे डिजाइन और आर्किटेक्चर के बारे में बताता है जिसे मौजूदा इमारतों को बदलने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा स्टूडेंट्स को स्टूडेंट्स को आर्किटेक्चर क्षेत्र के प्रिंसिपल की जानकारी देने के अलावा डिजाइन की क्वॉलिटी के बारे में भी बताया जाता है।

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