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12वीं में दो भाषाओं में पढ़ने की मजबूरी खत्म हुई हिंदी या अंग्रेजी के साथ आईटी

12वीं में दो भाषाओं में पढ़ने की मजबूरी खत्म हुई हिंदी या अंग्रेजी के साथ आईटी छत्तीसगढ़ में अगले सत्र यानी 2023-24 से बारहवीं सीजी बोर्ड में बड़ा बदलाव होगा। इसके तहत छात्रों को केवल एक ही भाषा परीक्षा होगी। 12वीं में दो भाषाओं में पढ़ने की मजबूरी खत्म हुई हिंदी या अंग्रेजी के साथ आईटी दरअसल, अब तक साइंस, आर्ट्स व कामर्स स्ट्रीम में तीन मुख्य विषय के अलावा दो भाषा के पेपर देने पड़ते हैं। इनमें मूल विषयों के साथ हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत जैसे भाषा के विषय हैं।

अधिकांश छात्र हिंदी व अंग्रेजी को चयन करते थे। लेकिन नए सत्र से अब छात्र चाहे तो एक भाषा को मुख्य पेपर में और एक को ऑप्शनल रख सकेंगे। वैकल्पिक विषय के नंबर नहीं जुड़ेंगे, इसलिए इसमें कोई फेल नहीं हाेगा। 12वीं बोर्ड में हर साल करीब पौने तीन लाख परीक्षार्थी शामिल होते हैं। इस बार की बोर्ड परीक्षा 1 मार्च 2023 से शुरू होगी।

इसमें दोनों भाषा की परीक्षा देना अनिवार्य है। इस वर्ष यह छूट नहीं दी गई है। माध्यमिक शिक्षा मंडल के अफसरों का कहना है कि नए सत्र से जब कक्षाएं शुरू होगी तब यह व्यवस्था लागू होगी। इसका फायदा छात्रों को मिलेगा। क्योंकि, एक भाषा की जगह वे बोर्ड से निर्धारित दस प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में से किसी एक का चयन कर सकेंगे। यही नहीं छात्र यदि चाहे तो स्वेच्छा से दूसरी भाषा को अतिरिक्त विषय के रूप में रख सकेंगे।

गौरतलब है कि कक्षा बारहवीं में कुल 13 भाषाएं हैं। इनमें से ही किसी दो भाषा का चयन करना पड़ता था। यह भाषाएं इस प्रकार हैं, हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत, मराठी, उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बंगाली, गुजराती, तेलुगू, तमिल, मलयालम और उड़िया।

नवीन व्यावसायिक विषय

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने व्यावसायिक पाठ्यक्रम में कुल दस ट्रेड को शामिल किया है। इसके तहत रिटेल मार्केटिंग मैनेजमेंट, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, आटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन, हेल्थ केयर, एग्रीकल्चर, मीडिया एंड इंटरटेनमेंट, टेलीकम्यूनिकेशन, बैकिंग फाइनेंशियल सर्विस एंड इंश्यूरेंस, ब्यूटी एंड वैलनेस और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर है।

अगले सत्र से 12वीं में पास होने वाले छात्र ज्यादा होंगे

शिक्षा सत्र 2023-24 से भाषा को लेकर नई व्यवस्था की जा रही है। 12वीं में दो भाषाओं में पढ़ने की मजबूरी खत्म हुई हिंदी या अंग्रेजी के साथ आईटी तब बारहवीं में पास होने वाले छात्र भी बढ़ेंगे। दरअसल, दो भाषा की अनिवार्यता की वजह से अधिकांश छात्र हिंदी व इंग्लिश का ही चयन करते हैं।

पिछले पांच वर्षों के रिजल्ट का आंकड़ा देखा जाए तो कोरोना काल को छोड़कर अन्य वर्ष में 22 से 24 प्रतिशत तक छात्र फेल हुए। इनमें से भी अधिकांश छात्र इंग्लिश विषय में फेल हुए। इस तरह दो भाषा की अनिवार्यता खत्म होने से पास होने वाले छात्र बढ़ेंगे।

Sapna

Sapna Yadav News Writer Daily Base News Post Agency Call - 9411668535, 8299060547, 8745005122 SRN Info Soft Technology www.srninfosoft.com

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