चितकारा यूनिवर्सिटी में आयोजित हुआ ‘डिजाइनअप डे’, विशेषज्ञों और डिजाइनरों ने सांझा किए विचार

चंडीगढ़
डिजाइन अब सिर्फ किसी उत्पाद या सेवा को आकर्षक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की जरूरतों, व्यवहार और वास्तविक समस्याओं को समझकर सार्थक समाधान तैयार करने का माध्यम बन गया है। तकनीक और बदलती मानवीय जरूरतों के बीच डिजाइनरों की भूमिका भी तेजी से बदल रही है। यह विचार चितकारा यूनिवर्सिटी के चितकारा डिजाइन स्कूल में आयोजित डिजाइनअप डे में सामने आया। कार्यक्रम में डिजाइनरों, रचनात्मक पेशेवरों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ डिजाइन की बदलती भूमिका और समाज पर इसके प्रभाव को लेकर विचार साझा किए।
कार्यक्रम में अलीशा नेपल्स, डिजाइनर, आर्टिस्ट, कोच एवं सोमैटिक प्रैक्टिशनर; शिवा विश्वनाथन, क्यूरेटर एवं डायरेक्टर, डिजाइनअप; नितीश यादव, एवीपी डिजाइन एवं रिसर्च, पॉकेट एफएम; और मेरु वशिष्ठ, ह्यूमन-सेंटर्ड डिजाइन लीड, इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।
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विशेषज्ञों ने डिजाइन, तकनीक, कहानी कहने, मानवीय व्यवहार और सामाजिक प्रभाव से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रभावी डिजाइन की शुरुआत समस्या को समझने से होती है। इसके लिए बारीकी से निरीक्षण करने, लोगों की जरूरतों और अनुभवों को समझने, प्रयोग करने तथा अलग-अलग क्षेत्रों की सोच को एक साथ जोड़ने की क्षमता जरूरी है। विद्यार्थियों ने जाना कि किसी उत्पाद, सेवा या समाधान को तैयार करते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि वह कैसा दिखता है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि उसका इस्तेमाल करने वाले लोग कौन हैं और उनकी वास्तविक जरूरत क्या है।
इस अवसर पर चितकारा यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट एवं सह-संस्थापक डॉ. मधु चितकारा ने कहा, “डिजाइन केवल ऐसी चीज तैयार करना नहीं है जो देखने में अच्छी लगे, बल्कि यह समझना है कि वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है। जब विद्यार्थी बारीकी से देखना, सही सवाल पूछना और संवेदनशीलता के साथ डिजाइन करना सीखते हैं, तो वे उन संभावनाओं को भी पहचान पाते हैं, जिन्हें दूसरे लोग सीमाओं के रूप में देखते हैं। डिजाइनअप जैसे मंच विद्यार्थियों को अलग-अलग अनुभव और दृष्टिकोण रखने वाले पेशेवरों से सीधे सीखने का अवसर देते हैं और उन्हें एक डिजाइनर की जिम्मेदारियों और संभावनाओं को समझने में मदद करते हैं।”
कार्यक्रम में तकनीक और सामाजिक बदलाव के दौर में डिजाइनरों की बदलती भूमिका पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि आज डिजाइनरों के लिए रचनात्मकता के साथ तकनीक, मानवीय व्यवहार और सामाजिक जरूरतों को समझना भी जरूरी है। विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों को एक साथ लाकर ही जटिल समस्याओं के लिए अधिक उपयोगी और प्रभावी समाधान तैयार किए जा सकते हैं।
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