हरियाणवी बोली के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा केयू: कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा

कुरुक्षेत्र, 15 सितम्बर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केयू धरोहर हरियाणा संग्रहालय एवं रत्नावली के माध्यम से हरियाणा की अनेक लुप्त होती हुई विधाओं को मंच से जोड़कर जीवंत किया है। इसी परम्परा में हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलवाने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा। इस आशय की घोषणा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने की। उन्होंने कहा कि हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केन्द्र की स्थापना केयू हिन्दी विभाग में की जा रही है। यह शोध केन्द्र आने वाले दिनों में हरियाणवी भाषा के संवर्धन के लिए भी कार्य करेगा।
उल्लेखनीय है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने रत्नावली के अवसर पर हरियाणवी को भाषा का दर्जा देने की मुहिम की शुरुआत की थी। इसके लिए हरियाणवी मीडिया चौपाल की स्थापना की थी। चौपाल पर सभी संस्कृति प्रेमियों का साक्षात्कार हरियाणवी में लिया गया था। इस मंच के माध्यम से हरियाणवी को खूब बढ़ावा मिला। युवाओं में हरियाणवी मीडिया चौपाल विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि पिछले दिनों कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने हिन्दी विभाग में लोक साहित्य एवं संस्कृति शोध केन्द्र की घोषणा की थी। जल्द ही यह शोध केन्द्र लोक संस्कृति पर शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए खुल जाएगा। इस शोध केन्द्र में हरियाणवी लोक साहित्य एवं संस्कृति से जुड़ी हुई 7000 से अधिक पुस्तकें एवं शोध प्रबन्ध रखे जा रहे हैं ताकि हरियाणा की लोक साहित्य एवं संस्कृति से जुड़ी हुई समस्त सामग्री सभी हरियाणवी शोधार्थियों को एक स्थान पर मिल सकें।
उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव डॉ. वरूण गुलाटी ने भी हिन्दी दिवस के अवसर पर हरियाणवी भाषा एवं हरियाणा की अलग-अलग बोलियों जिनमें कौरवी, अहीरवाटी, ब्रज, मेवाती, बांगरू, बागड़ी शामिल हैं, के संरक्षण में संस्कृति मंत्रालय का शोध केन्द्र स्थापित करने के लिए उद्घोषणा की है। आने वाले दिनों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हरियाणवी बोली को भाषा एवं हरियाणवी भाषा की उपबोलियों के संरक्षण में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरियाणवी बोली में फिल्में बनाने का दौर भी शुरू हो चुका है। इस कड़ी में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय अकादमिक दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।
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