
कुरुक्षेत्र, 3 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि सशक्त महिला ही सबल समाज की आधारशिला होती है। जब महिलाएं विज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तो वे न केवल स्वयं को सशक्त बनाती हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का वूमेन इन स्टेम फोरम इसी लक्ष्य को साकार करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित (स्टेम) के क्षेत्र किसी भी राष्ट्र की प्रगति, नवाचार और आत्मनिर्भरता के महत्वपूर्ण आधार हैं। इन क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल लैंगिक समानता को सुदृढ़ करती है, बल्कि समाज और राष्ट्र के समग्र विकास को भी गति प्रदान करती है। इसी सोच को साकार रूप देने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में वर्ष 2019 में वूमेन इन स्टेम फोरम की स्थापना की गई, जो आज महिला वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और छात्राओं के लिए प्रेरणा एवं अवसरों का सशक्त मंच बन चुका है।
वूमेन इन स्टेम फोरम की समन्वयक प्रो. अनीता भटनागर ने बताया कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें शोध एवं नवाचार के लिए प्रेरित करने तथा नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से फोरम लगातार कार्य कर रहा है। फोरम के माध्यम से छात्राओं और महिला शोधकर्ताओं को मार्गदर्शन, नेटवर्किंग, करियर परामर्श तथा प्रेरणादायक रोल मॉडल उपलब्ध कराए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि महिलाओं ने अनेक सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। एडा लवलेस, मैरी क्यूरी और ग्रेस हॉपर जैसी वैश्विक हस्तियों से लेकर भारत की आसिमा चटर्जी, ई. के. जानकी अम्माल, कमला सोहोनी, टेसी थॉमस और रोहिणी गोडबोले तक अनेक महिलाओं ने विज्ञान को नई दिशा प्रदान की है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का वूमेन इन स्टेम फोरम समय-समय पर साइंस कार्निवल, पोस्टर एवं मॉडल निर्माण प्रतियोगिताएं, स्लोगन लेखन, विशेषज्ञ व्याख्यान, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम तथा लैंगिक समानता एवं नेतृत्व विकास से जुड़े आयोजनों के माध्यम से छात्राओं में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित कर रहा है। इन कार्यक्रमों से युवतियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ी है तथा उन्हें अपने शोध और करियर को नई दिशा देने का अवसर मिला है।
उन्होंने बताया कि कुवि कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने वर्ष 2024 से वूमेन इन स्टेम पुरस्कारों की शुरुआत कर महिला वैज्ञानिकों और शोधार्थियों की उत्कृष्ट उपलब्धियों को सम्मानित करने की परंपरा भी शुरू की है। इन पुरस्कारों के अंतर्गत उच्च प्रभाव वाले शोध पत्र, शोध अनुदान, स्वीकृत पेटेंट, सर्वश्रेष्ठ महिला शोधार्थी तथा सर्वश्रेष्ठ पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो जैसी श्रेणियों में सम्मान प्रदान किए जाते हैं। यह पहल महिला शोधकर्ताओं को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि महिलाओं को केवल स्टेम क्षेत्रों में प्रवेश दिलाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वहां बनाए रखना, उनकी पहचान स्थापित करना और नेतृत्व के अवसर प्रदान करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके लिए परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों और सरकार को मिलकर कार्य करना होगा।
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